सवाल पूछती 'Gen-Z' और चरमराता शिक्षा तंत्र: हक मांगने वाला युवा 'दिमागी नक्सल' कैसे हो गया? आज का भारत दुनिया का सबसे युवा देश कहलाता है। यह वह पीढ़ी है (Gen-Z और मिलेनियल्स), जो अपने सुनहरे भविष्य, रोजगार और आत्मसम्मान के लिए दिन-रात लाइब्रेरी के छोटे से कमरों में किताबों से जूझ रही है। लेकिन जब यही युवा सिस्टम की कमियों पर सवाल उठाता है, पेपर लीक के खिलाफ आवाज बुलंद करता है या बंद होते सरकारी स्कूलों पर बात करता है, तो उसे समाधान के बदले 'वैचारिक उग्रवादी' या 'दिमागी नक्सल' जैसे लेबल्स थमा दिए जाते हैं। लोकतंत्र में बुनियादी सवाल यह है—क्या परीक्षा में पारदर्शिता और बेहतर शिक्षा की मांग करना अपराध है? 1. पेपर लीक का अंतहीन सिलसिला: NEET से लेकर राज्य परीक्षाओं तक देश के युवाओं की सबसे बड़ी निराशा का कारण लगातार हो रहे पेपर लीक और रद्द होती परीक्षाएं हैं: NEET और NTA की साख पर सवाल: लाखों छात्र और उनके अभिभावक अपने जीवन की गाढ़ी कमाई और कई साल NEET जैसी मेडिकल प्रव...
Mano Drishti
Exploring The Psychology Of Life, Emotions, And Human Nature Through Deep Insights And Cinematic Visuals.